गाजियाबाद (अबशार उलहक) : मुरादनगर में युवक हिमांशु तेवतिया पर हुए जानलेवा हमले को 17 दिन बीत चुके हैं, लेकिन पुलिस अब तक न तो हमलावरों तक पहुंच सकी है और न ही उनकी पहचान सामने आ पाई है। 8 अक्टूबर की शाम जलालपुर रोड स्थित सरकारी स्कूल के पास हिमांशु पर धारदार हथियार से हमला किया गया था। गंभीर रूप से घायल हिमांशु ने इलाज के दौरान 9 अक्टूबर की सुबह करीब 4 बजे दम तोड़ दिया था।
बताया गया कि हिमांशु ड्यूटी खत्म कर स्कूटी से अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान सरकारी स्कूल के पास उन पर हमला हुआ। कुछ युवकों ने घायल हालत में हिमांशु को उनके घर पहुंचाया, जिसके बाद परिजनों ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया। रातभर इलाज के बाद उनकी मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस कंट्रोल रूम को शुरुआत में युवक को गोली मारे जाने की सूचना मिली थी। पुलिस मौके पर पहुंची तो गोलीबारी के कोई स्पष्ट निशान नहीं मिले। घटनास्थल से हिमांशु की स्कूटी और बैग बरामद किया गया। मामले में परिजनों ने मुरादनगर थाने में अज्ञात हमलावरों के खिलाफ शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की। लेकिन अब सवाल यह है कि इतने दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस की जांच आखिर किस दिशा में पहुंची है?
परिजनों को अपने बेटे की हत्या के पीछे की वजह जानने और आरोपियों की गिरफ्तारी का इंतजार है। वहीं इलाके के लोगों के बीच भी यह सवाल बना हुआ है कि जलालपुर रोड पर आखिर उस रात हिमांशु के साथ क्या हुआ था?
सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि अगर घटनास्थल से स्कूटी और बैग बरामद हुए थे, तो क्या पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली? क्या उस रास्ते से गुजरने वाले लोगों से पूछताछ की गई? क्या हिमांशु के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल और आखिरी लोकेशन की जांच से कोई सुराग मिला? और क्या हमले के पीछे किसी पुरानी रंजिश या विवाद की आशंका की जांच की गई? 17 दिन बाद भी अगर हमलावरों की पहचान सामने नहीं आई है, तो परिवार और स्थानीय लोगों के मन में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर जांच कहां तक पहुंची?
हिमांशु की मौत को 17 दिन बीत चुके हैं, लेकिन परिवार के लिए इंसाफ का इंतजार अभी खत्म नहीं हुआ है। अब देखना होगा कि पुलिस कब इस मामले की गुत्थी सुलझाकर हमलावरों की पहचान करती है और कब हिमांशु के परिवार को न्याय मिल पाता है।


