अलीगंज अग्निकांड के बाद नोएडा सीएफओ भी नोएडा में काफी जगह आग बुझाने में रहे नाकामयाब करोड़ों का नुकसान जान मॉल की हानि पर लापरवाह अधिकारी पर कब गिरेगी गाज

नोएडा( प्रदीप मिश्रा ): अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड के बाद नोएडा फायर विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर चर्चा और सवालों के केंद्र में आ गई है। लगातार सामने आ रही आग की घटनाओं ने न केवल फायर सेफ्टी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि विभागीय जवाबदेही को लेकर भी बहस तेज कर दी है।

‎‎स्थानीय लोगों और उद्योग जगत से जुड़े कई लोगों का कहना है कि नोएडा में इस वर्ष अब तक दर्जनों स्थानों पर आग लगने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इनमें औद्योगिक इकाइयां, गोदाम, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और अन्य संस्थान शामिल हैं। ऐसे में लोग फायर सुरक्षा व्यवस्था और उसकी निगरानी प्रणाली को और मजबूत बनाने की मांग कर रहे हैं।

‎इसी बीच, नोएडा के मुख्य अग्निशमन अधिकारी (सीएफओ) प्रदीप कुमार की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि हाल के वर्षों में हुई कई बड़ी आग की घटनाओं में नुकसान को कम करने और आग पर शीघ्र नियंत्रण पाने को लेकर विभाग की क्षमता पर चर्चा हो रही है। हालांकि, इन आरोपों पर विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

‎सेक्टर-4 स्थित बिजली मीटर गोदाम में लगी भीषण आग भी चर्चा का विषय बनी रही, जहां आग पर पूरी तरह काबू पाने में कई दिन लगे। इस घटना के बाद विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी बड़ी औद्योगिक और गोदाम संबंधी आग से निपटने के लिए अत्याधुनिक उपकरण, पर्याप्त संसाधन और विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है। इस घटना ने भी फायर विभाग की तैयारियों और संसाधनों की उपलब्धता पर सवाल खड़े किए हैं।

‎जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि फायर विभाग को सार्वजनिक रूप से यह जानकारी साझा करनी चाहिए कि इस वर्ष कितने संस्थानों का निरीक्षण किया गया, कितनों में फायर सुरक्षा संबंधी कमियां पाई गईं, कितनों के खिलाफ कार्रवाई की गई और कितने मामलों में नोटिस या अन्य दंडात्मक कदम उठाए गए।

‎विशेषज्ञों का मानना है कि जनसुरक्षा से जुड़े इस संवेदनशील विषय पर पारदर्शिता, नियमित ऑडिट और जवाबदेही सुनिश्चित करना समय की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके और लोगों का भरोसा व्यवस्था पर बना रहे।