मातृ दिवस- हर मां को समर्पित एक सुंदर दिवस : ईशा त्रिपाठी सूरी

(दीपक मिश्रा) शिव शक्ति जनकल्याण ट्रस्ट की संस्थापिका एवं महिला यौन उत्पीड़न प्रतिषेध समिति केंद्रीय कारागार वाराणसी विशाखा समिति प्रयागराज की सदस्या ( *ईशा त्रिपाठी सूरी* ) ने मातृ दिवस की सभी को शुभकामनाओं के साथ एक सन्देश दिया। कि आज पूरा विश्व ‘मातृ दिवस’ मना रहा है। यह दिन कैलेंडर की किसी सामान्य तारीख मात्र नहीं है, बल्कि उस शक्ति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का पर्व है, जिसे हम ‘माँ’ कहते हैं। एक माँ न केवल एक जीवन को जन्म देती है, बल्कि वह समाज और राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करने वाली प्रथम शिक्षिका भी होती है।

तप और त्याग की प्रतिमूर्ति

​आधुनिक दौर में जहाँ रिश्तों की परिभाषाएं बदल रही हैं, माँ का निस्वार्थ प्रेम आज भी अडिग है। समाचार जगत के दृष्टिकोण से देखें तो आज की माताएं केवल घर की चहारदीवारी तक सीमित नहीं हैं। आज वे पुलिस (IPS/PPS), प्रशासन, और सैन्य सेवाओं में रहकर राष्ट्र की रक्षा भी कर रही हैं और साथ ही एक ममतामयी माँ का दायित्व भी बखूबी निभा रही हैं।

संस्कारों का बीजारोपण

परिवार की धुरी माँ ही होती है, जो बच्चों में नैतिकता और मानवीय मूल्यों का संचार करती है।

सशक्तिकरण का प्रतीक: ‘मिशन शक्ति’ जैसी योजनाओं ने आज की माताओं को और अधिक सशक्त और आत्मनिर्भर बनाया है, जिससे वे अपने बच्चों को बेहतर भविष्य प्रदान कर पा रही हैं।

भावनात्मक संबल: संघर्ष के दिनों में जब दुनिया साथ छोड़ देती है, तब माँ का विश्वास ही व्यक्ति को पुनः उठने की शक्ति देता है।

​वर्तमान समय में भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच यह दिन हमें रुककर यह सोचने का अवसर देता है कि क्या हम अपनी व्यस्तता में उस माँ को पर्याप्त समय दे पा रहे हैं, जिसने अपना पूरा जीवन हमारे लिए समर्पित कर दिया। सम्मान केवल एक दिन फूलों या उपहारों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उनके प्रति सेवा और आदर का भाव जीवन भर बना रहना चाहिए।

​मातृ दिवस का संदेश यही है कि समाज में नारी और माता का स्थान सदैव सर्वोच्च रहे। उनके त्याग का ऋण उतारना संभव नहीं है, लेकिन उनके चेहरे पर एक मुस्कान लाना ही इस दिन की असली सार्थकता है।