दिल्ली (दीपक मिश्रा) : अपने कार्यों से लोगों के दिलों पर राज करने वाली जानी मानी समाजसेवी ईशा त्रिपाठी सूरी के काम अनुकरणीय समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों के प्रति करुणा और सेवा का भाव ही किसी सामाजिक कार्यकर्ता की वास्तविक पहचान होती है। ‘शिवशक्ति जनकल्याण ट्रस्ट’ की संचालिका ईशा त्रिपाठी सूरी पिछले डेढ़ दशक से इसी संकल्प के साथ समाज सेवा के क्षेत्र में सक्रिय हैं। समाज सेवा में 15 से अधिक वर्षों का अनुभव रखने वाली ईशा त्रिपाठी ने अपने कार्यों से समाज के उन हिस्सों को छुआ है, जिन्हें अक्सर मुख्यधारा द्वारा अनदेखा कर दिया जाता है। ईशा त्रिपाठी के इसी समर्पण भाव को देखते हुए दिल्ली सरकार के समाज कल्याण विभाग ने उन्हें यौन शोषण समिति का सदस्य नियुक्त किया है। दिल्ली सरकार का धन्यवाद करते हुए ईशा त्रिपाठी कहती हैं कि वह अपने नए दायित्व का निर्वहन भी पूर्ण निष्ठा के साथ करेंगी।
ईशा त्रिपाठी के सामाजिक जीवन का सबसे अनुकरणीय और अनूठा पहलू जेल के कैदियों और उनके परिवारों के प्रति उनका मानवीय दृष्टिकोण है। अधिकांश सामाजिक संस्थाएं सामान्य नागरिकों के बीच काम करती हैं। लेकिन उन्होंने सलाखों के पीछे बंद लोगों को जीवन की नई राह दिखाने का बीड़ा उठाया। वह जेल के कैदियों के मानसिक स्वास्थ्य, उनके मानवाधिकारों और जेल से छूटने के बाद उनके पुनर्वास के लिए निरंतर काम करती हैं। ईशा का मानना है। कि अपराध से घृणा होनी चाहिए, अपराधी से नहीं।
जेलों और ग्रामीण क्षेत्रों में वंचितों को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है। उनके संगठन द्वारा उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित केंद्रीय कारागार (शिवपुर) में एक विशेष स्वास्थ्य पहल की गई, जिसके तहत दिव्यांग एवं वृद्ध कैदियों को कान की मशीनें और अन्य आवश्यक उपकरण वितरित किए गए। ऐसे कार्यों से ईशा त्रिपाठी ने न केवल बंदियों के शारीरिक कष्ट को कम किया, बल्कि उन्हें समाज में वापस लौटने की उम्मीद भी दी।
एक महिला सामाजिक कार्यकर्ता होने के नाते ईशा त्रिपाठी महिलाओं के अधिकारों के प्रति बेहद संवेदनशील हैं। वह महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कौशल विकास कार्यक्रमों का संचालन करती हैं। इसके अतिरिक्त, वह ग्रामीण और पिछड़ी पृष्ठभूमि की महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति सचेत करने के लिए विधिक जागरूकता अभियान भी चलाती हैं। ताकि समाज का शोषित वर्ग अपने अधिकारों के लिए आवाज उठा सके।
शिवशक्ति जनकल्याण ट्रस्ट के माध्यम से ईशा त्रिपाठी समाज के विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग और अत्यंत जरूरतमंद वर्ग के बीच की खाई को पाटने का प्रयास कर रही हैं। वे गरीब और झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले बच्चों के लिए शिक्षा सामग्री वितरित करने और उनकी प्राथमिक शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न प्रोजेक्ट चलाती हैं।
ईशा त्रिपाठी सूरी का जीवन और उनके कार्य इस बात का प्रमाण हैं कि यदि दृढ़ इच्छाशक्ति और सच्ची सहानुभूति हो, तो समाज के सबसे अंधकारमय कोनों में भी उम्मीद की लौ जलाई जा सकती है। उनका यह निस्वार्थ योगदान न केवल वर्तमान पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक है, बल्कि एक समतामूलक और संवेदनशील समाज के निर्माण में भी मील का पत्थर है।


