मुरादनगर (अबशार उलहक) : लाखों-करोड़ों रुपये के विकास कार्यों का ढोल पीटने वाली मुरादनगर नगरपालिका के पास समस्याओं का स्थायी समाधान हो या न हो, लेकिन अजीबो-गरीब जुगाड़ की कोई कमी नहीं है। दिल्ली-मेरठ रोड स्थित मुरादनगर रैपिड रेल स्टेशन के पिलर नंबर 912 के नीचे जलभराव की समस्या कोई नई नहीं है, बल्कि स्थानीय लोगों की मानें तो यह समस्या वर्षों पुरानी बन चुकी है। लेकिन इस बार नगरपालिका के जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों ने जलभराव से निपटने का जो नायाब तरीका निकाला है, उसने विकास के दावों की धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं।

हाल ही में दिल्ली-मेरठ रोड पर लाखों रुपये की लागत से नए नालों का निर्माण कराया गया था ताकि हाईवे और आसपास के क्षेत्रों को जलभराव से मुक्ति मिल सके। लेकिन नाला बनाने वाले ठेकेदार और उनके सर्वेयर शायद यह बुनियादी बात ही भूल गए कि सड़क का पानी नाले के अंदर पहुंचेगा कैसे। परिणाम यह हुआ कि सड़क पर पानी का समंदर बन गया और जब निकासी का कोई रास्ता नहीं बचा, तो नगरपालिका की टीम ने लाखों की लागत से हाल ही में बने पक्के नाले को ही तोड़ डाला।

तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि कैसे सड़क पर जमा पानी को निकालने के लिए कर्मचारियों ने सड़क के किनारे एक छोटी नाली खोदी और फिर नवनिर्मित पक्के नाले के एक हिस्से को तोड़कर पानी बहाने की कोशिश की। इस घटना से यह बड़ा सवाल उठता है कि जब नाला बनाया जा रहा था, तब जल निकासी के लिए सही प्लानिंग क्यों नहीं की गई और सरकारी पैसे की इस तरह बर्बादी की जवाबदेही आखिर किसकी है।

स्थानीय निवासियों और राहगीरों में इस लापरवाही को लेकर भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि लाखों-करोड़ों के बजट से काम करने वाले अधिकारियों की कार्यशैली देखकर लगता है कि वे समस्या का समाधान नहीं, बल्कि उसे और बढ़ाकर काम करने में यकीन रखते हैं। दिल्ली-मेरठ रोड पर रोजाना हजारों यात्री और वाहन गुजरते हैं, और रैपिड रेल जैसे आधुनिक प्रोजेक्ट के ठीक नीचे नगरपालिका की इस अधकचरी कार्यप्रणाली से पूरे शहर की छवि धूमिल हो रही है। अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन इस नालायकी पर कोई कड़ा संज्ञान लेगा या जनता यूं ही इस अनूठी इंजीनियरिंग को झेलने के लिए मजबूर रहेगी।


