उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में खाद्य सुरक्षा विभाग ने बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाली एक बड़ी साजिश का पर्दाफाश किया है। यहाँ राशिद अली द्वारा संचालित शाजिया गोल्ड ट्रेडिंग कंपनी में बनाई जा रही बच्चों की पसंदीदा “कचरी” के नमूनों में खतरनाक रसायनों की पुष्टि हुई है। दरअसल पिछले दिनों विभाग ने इस फैक्ट्री पर छापेमारी करते हुए भारी मात्रा में कचरी का स्टॉक जब्त किया था और इसके सैंपल जांच के लिए लैब भेजे थे। अब लैब रिपोर्ट सामने आने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि इस कचरी को आकर्षक बनाने के लिए जहरीले रंगों का सहारा लिया जा रहा था।

जांच रिपोर्ट के अनुसार इस कचरी को रंग-बिरंगा करने के लिए कार्मोसिन कलर का इस्तेमाल किया गया था, जो मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत विषाक्त माना जाता है। खाद्य पदार्थों में इस रंग का इस्तेमाल करना स्वास्थ्य मानकों के विरुद्ध है और पूरी तरह प्रतिबंधित है। हालांकि भारत में कुछ विशेष खाद्य उत्पादों में इसके सीमित उपयोग की अनुमति है, लेकिन उसके लिए अनिवार्य शर्त यह है कि उत्पाद के पैकेट पर इसका फूड कोड- E122 स्पष्ट रूप से लिखा होना चाहिए, जिसका पालन इस कंपनी द्वारा नहीं किया गया था।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कार्मोसिन कलर का सेवन बच्चों के लिए विशेष रूप से घातक है क्योंकि इससे न केवल त्वचा पर रिएक्शन और गंभीर एलर्जी हो सकती है, बल्कि बच्चों में हाइपरएक्टिविटी जैसी व्यवहारिक समस्याऐं भी पैदा हो जाती हैं। प्रशासन ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए कुल 13 कुंटल कचरी को जब्त कर लिया है ताकि इसे बाजार में बिकने से रोका जा सके। फिलहाल रिपोर्ट के आधार पर विभाग संबंधित फैक्ट्री मालिक के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की तैयारी कर रहा है।


