गाजियाबाद में एक 70 वर्षीय व्यक्ति द्वारा 20 साल की युवती से निकाह किए जाने के वायरल मामले ने अब राजनीतिक मोड़ ले लिया है। इस प्रकरण के मुख्य पात्र हाजी खलील को सोशल मीडिया और पुलिस शिकायतों में ‘सपा नेता’ बताए जाने पर समाजवादी पार्टी ने कड़ा ऐतराज जताया है। पार्टी के जिला अध्यक्ष फैसल हुसैन और महानगर अध्यक्ष वीरेंद्र यादव ने एक आधिकारिक आपत्ति पत्र जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि हाजी खलील का समाजवादी पार्टी से वर्तमान में कोई लेना-देना नहीं है और न ही वह पार्टी के सदस्य हैं। सपा ने तथ्यों का हवाला देते हुए बताया कि हाजी खलील ने वर्ष 2023 का नगर निगम चुनाव वार्ड संख्या 92 से बहुजन समाज पार्टी (BSP) के टिकट पर लड़ा था, जिसका प्रमाण आधिकारिक निर्वाचन रिकॉर्ड में भी दर्ज है।

पार्टी ने इस पूरे मामले को पूरी तरह से एक निजी और पारिवारिक संपत्ति विवाद करार दिया है, जिसमें जानबूझकर समाजवादी पार्टी का नाम घसीटकर उसकी छवि धूमिल करने की कोशिश की जा रही है। सपा नेताओं का कहना है कि शिकायतकर्ता द्वारा गाजियाबाद पुलिस को दी गई तहरीर में हाजी खलील को ‘सपा नेता’ बताना एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश का हिस्सा है, जो पूरी तरह निराधार और तथ्यों से परे है। इस स्पष्टीकरण के साथ पार्टी ने मीडिया और जनता से अपील की है कि इस पारिवारिक प्रकरण को समाजवादी पार्टी से जोड़कर न देखा जाए।


