मुरादनगर में नाराज दलित समाज: सांसद संजय सिंह ने बाबा साहब की मूर्ति को किया ‘अनदेखा’

मुरादनगर (अबशार उलहक) : आम आदमी पार्टी के फायरब्रांड नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह की ‘सामाजिक सद्भाव पदयात्रा’ मुरादनगर पहुंचते ही एक बड़े विवादों के भंवर में फंस गई है। मेरठ से गाजियाबाद तक निकाली जा रही इस यात्रा के पांचवें चरण में कल शाम मुरादनगर में भारी ड्रामा देखने को मिला। मंच से ‘संविधान खतरे में है’ और ‘बाबा साहब का सपना अधूरा है’ का नारा बुलंद करने वाले संजय सिंह पर मुरादनगर में बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की मूर्ति का सम्मान ना करने के गंभीर आरोप लग रहे हैं, जिससे स्थानीय दलित समाज में भारी नाराजगी देखने को मिली।

कथनी और करनी का अंतर? मूर्ति पर नमन से ‘परहेज’, रैपिड स्टेशन के नीचे ‘विश्राम’!

‎कल शाम जब संजय सिंह का काफिला मुरादनगर पहुंचा, तो कार्यकर्ताओं ने फूलों की मालाओं से उनका जोरदार स्वागत किया। लेकिन असली विवाद तब शुरू हुआ जब यह यात्रा मुरादनगर की ऐतिहासिक धरोहर डॉ. भीमराव अंबेडकर मूर्ति के सामने से गुजरी।

‎वहां मौजूद लोगों का कहना है कि संजय सिंह ने बाबा साहब की मूर्ति को पूरी तरह अनदेखा कर दिया। उन्होंने वहां रुककर नमन करना या माल्यार्पण करना तो दूर, कार्यकर्ताओं को बिना रुके आगे बढ़ने का इशारा कर दिया।

हैरानी की बात:  बाबा साहब के पार्क को छोड़, उससे महज चंद कदमों की दूरी पर स्थित मुरादनगर रैपिड रेल स्टेशन के नीचे पूरी यात्रा को रोक दिया गया, जहां सांसद और उनके कार्यकर्ताओं ने पैर सीधे किए और आराम फरमाया।

जनता का तीखा सवाल: मुरादनगर के चौक-चौराहों पर अब यही चर्चा है कि जो आराम कंक्रीट के रैपिड स्टेशन के नीचे किया गया, वो आराम संविधान निर्माता के चरणों में बैठकर क्यों नहीं किया जा सकता था? क्या ‘आप’ नेताओं के पास बाबा साहब को दो मिनट देने के लिए समय नहीं था?

‎”यह सिर्फ वोटों का पाखंड है…” – दलित समाज ने खोला मोर्चा

‎इस घटना के बाद मुरादनगर के दलित समाज और स्थानीय नागरिकों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। आज हर चौक-चौराहे वव गलियारों में आम आदमी पार्टी के खिलाफ प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है

गहरी नाराजगी: स्थानीय दलित संगठनों का कहना है, “देश-प्रदेश के बड़े नेता आते हैं, हमारे मसीहा का सम्मान करे बिना अपने आगे के पड़ाव को नही निकलते। मगर वही सांसद संजय सिंह उनके सामने सिर झुकाना तो दूर नजरें चुराकर निकल जाते हैं। संजय सिंह का यह रवैया दलित विरोधी मानसिकता को दर्शाता है।”

दोगलेपन का आरोप: स्थानीय लोगों ने कहा कि मोदीनगर में संजय सिंह कह रहे थे कि यूपी में भेदभाव हो रहा है, लेकिन मुरादनगर आते ही उन्होंने खुद महापुरुषों के सम्मान में भेदभाव करके दिखा दिया।  दूसरों पर उंगली उठाने वाले संजय सिंह अब खुद अपनों के बीच घिर चुके हैं। बाबा साहब की मूर्ति की अनदेखी का यह मुद्दा अब पश्चिमी यूपी की राजनीति में तूल पकड़ता जा रहा है।