डीएम साहब, दबंगों से हमारी जान और जमीन बचाइए ! मुरादनगर की बुजुर्ग दलित महिला ने लगाई गुहार

गाजियाबाद/मुरादनगर (अबशार उलहक) : उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के मुरादनगर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक 65 वर्षीय बेसहारा दलित विधवा महिला अपनी पुश्तैनी जमीन बचाने के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है। थाना दिवस में पहुंचकर पीड़ित महिला ने अधिकारियों के सामने अपनी आपबीती सुनाई। महिला का आरोप है कि उसकी पुश्तैनी भूमि पर स्थानीय दबंगों ने कब्जा कर रखा है और विरोध करने पर मारपीट कर जातिसूचक गालियां दी जा रही हैं।

लंबे समय से अधिकारियों के काट रही चक्कर

‎पीड़िता ओमवती (पत्नी स्वर्गीय रामशरण, निवासी सर्राफा बाजार, सिक्को वाली गली) का कहना है कि वे लंबे समय से न्याय के लिए अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काट रही हैं, लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। न्याय की आस में पीड़ित परिवार ने गाजियाबाद के जिलाधिकारी (DM), पुलिस कमिश्नर और राज्य महिला आयोग सहित कई उच्च अधिकारियों को लिखित शिकायत भेजकर गुहार लगाई है।

‎क्या है पूरा मामला?

‎शिकायत के अनुसार, पुरानी धर्मशाला विजय मंडी, राणा मैरिज होम के पास पीड़िता की लगभग 1200 वर्ग गज पुश्तैनी भूमि (खसरा संख्या 1740) है। इसमें से 600 वर्ग गज उनके बेटों (सुभाष और वीरेंद्र कुमार) और शेष 600 वर्ग गज उनके लकवाग्रस्त देवर रामपाल के नाम दर्ज है। दबंगों की नजर इसी 600 गज जमीन पर है।

‎पीड़िता का आरोप है कि 15 मई 2026 को जब वह अपने देवर के साथ जमीन पर गई थीं, तब विष्णु गोयल (पूर्व बैंक अधिकारी), रामकिशन, बब्बू, सुशील गोयल और 5 अन्य अज्ञात लोगों ने उनके साथ अभद्रता की। दबंगों ने हाथापाई करते हुए जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया और धमकी दी।

एसडीएम के आदेश बेअसर, पटवारी पर लापरवाही का आरोप

‎इस गंभीर मामले में मोदीनगर एसडीएम (SDM) ने संज्ञान लेते हुए क्षेत्रीय पटवारी संजय सिंह को सख्त आदेश दिए थे कि वे कब्जाधारियों से जमीन के कागजात दिखाने की मांग करें और मामले की जांच करें। लेकिन आरोप है कि पटवारी संजय सिंह ने अभी तक इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। वे पीड़ित पक्ष को सिर्फ आश्वासन दे रहे हैं, जिसके कारण बुजुर्ग महिला को न्याय के लिए भटकना पड़ रहा है।

प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल

‎एक तरफ बुजुर्ग महिला और उसका लकवाग्रस्त देवर दबंगों के खौफ और असुरक्षा के साये में जी रहे हैं, वहीं दूसरी ओर निचले स्तर के कर्मचारियों की लापरवाही ने सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह देखना बेहद अहम होगा कि मुरादनगर पुलिस और उच्च प्रशासन इस मामले में कब तक सख्त कदम उठाता है और बेसहारा महिला को कब उसकी जमीन वापस मिल पाती है।